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Hymn No. 1626 | Date: 26-Mar-2000
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अगर ना है विश्वास तो रखना ना कोई आश।
अगर ना है विश्वास तो रखना ना कोई आश।
माया का है पाश में, जिसे तोड़ना है श्रध्दा से।
तब लेंगी जन्म मन में विशुध्द प्रेम की तरंगे।
होगी शुरूआत तब जाके, भगवत् रंग में रंग जाने की।
जब डूबेंगा तू परमतत्व में, मिट जायेगा तब भेद हर।
जग में रहके तू स्वामी होगा अनंत जगत का।
अरे बबलूआँ मरेगा तेरा तन, ना तू कभी।
अभी से कर दे शुरूआत रहके तन में, परे हो जाने की।
आज नहीं तो कल उठाना पड़ता है सबको ये कदम ।
तुझको तो ले जाने आया है, परम्पिता बदलके वेश।


- डॉ.संतोष सिंह