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Hymn No. 159 | Date: 23-May-1998
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तुझसे दूर रहना है मेरे लिये सबसे बड़ी सजा;
तुझसे दूर रहना है मेरे लिये सबसे बड़ी सजा;
काटे नहीं कटता हर पल लगे बरस के समान ।
तेरे यादों में खोयें रहना है मेरी आदत ;
इसके सिवाय कोई काम नहीं आता, लेतें रहूं तेरा नाम ।
मेरा हर खॉब अधुरा है तेरे बिना;
तूने ही तो सजाया है मेरी जिंदगी ।
तेरी बंदगी में गुजार दूंगा अपनी सारी जिंदगी,
तो भी कम है ऐसी कई जिंदगी गुजार दूँगा तेरे चरणों में ।
तूझे पाना मेरे लिये कुछ और है ;
तेरे चरणों की एक रज कण मिल जाये तों, उसपे सारी जन्नत कुर्बान है ।
सारे सुख मिल जाये तो मैं बरबाद हूँ,
दुःखों का हर लम्हा खूबसूरत है जब आती है याद हर पल तेरी ।


- डॉ.संतोष सिंह