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Hymn No. 160 | Date: 23-May-1998
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तेरा अंदाज इतना निराला है, कौन क्या कर सकता है ;
तेरा अंदाज इतना निराला है, कौन क्या कर सकता है ;
जो सजदा करते हैं तेरी, धीमे – धीमे पीछे हटते हुये तुझको सलाम करते है ।
तेरे नाम का जाम जो दिन – रात पीते है
वो भी तो तेरी बात कहने से पहले तुझको सलाम करते है ।
तेरी हर बात की क्या बात है ;
जो सदियों से बैठे तेरे ध्यान में, वो भी मौन हो जाते है तूझे समझते ही ।
अच्छे – अच्छे ज्ञानी भी हो जाते है चुप तेरे मतवालों के सामने ;
जिन्होंने सिर्फ चख रखी है तेरे प्यार की दो बूँदें ।
देवता भी मिलने को रहते है तरसते तुझसे ;
और तू दौडे पगलाया हुआ सा अपने प्रेमियों के पीछे ।
तू कब क्या कर बैठें कोई न जाने, कोई न जाने ;
हर सच्ची बात झूठी नजर आती है और झूठी बात सच्ची हो जाती है ।
तेरे मन में किसके लिये क्या है वो तू ही जाने ;
दर भर की ठोकरें खाने के बाद, जिसने शरण लिया तेरे दर पे उसने भी जग जीता ।


- डॉ.संतोष सिंह