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Hymn No. 161 | Date: 26-May-1998
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तेरे लिये क्या मुश्किल है, इस जहाँ में जो तूने चाहा वही तो होता है
तेरे लिये क्या मुश्किल है, इस जहाँ में जो तूने चाहा वही तो होता है
पत्ता भी नहीं हिलता है तेरी मर्जी के बिना, हम सबका, तूही तो है एक जन्मदाता ।
चाँद और सूरज को तूने बसाया है इस जहाँ में आकाश को तूने है सजाया तारों से ।
दरबदर की ठोकरें खाते हुये लोग तूझे खोजते है, तेरी यादों के संग बसते है कितने – लोग जंगलो में।
हम सबको अपनी सुनहली दुनिया में बसाके, तू छुप जाता है क्यों घट – घट में ।
हमारे मन को तूने इतना कमजोर क्यों बनाया, तुझको छोडकर मन भी रम जाता है जग में ।
जब सब कुछ तू ही है कर्ता, तो क्यों हम लोग भोग भोगते है इस तन मन पे ।
हमारा उद्धार होना जब तेरे ही हाथों होना है, तो तू क्यों देर है इतना करता ।


- डॉ.संतोष सिंह