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Hymn No. 1628 | Date: 29-Mar-2000
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मेरी जान कुर्बान है मेरा दिल तुझपे, मत पूछ क्यों ना पता है मुझकों।
मेरी जान कुर्बान है मेरा दिल तुझपे, मत पूछ क्यों ना पता है मुझकों।
रहता है हर पल यादों में तेरे, शेखचिल्ली की तरह देखे ख्वाँब ले लेके तुझे।
माना कि तेरा मिलना सबके वश की बात नहीं, फिर भी रहता हूँ उधेड़ - बुन में पाने के लिये तेरा साथ।
नाकाबिल मैं बोझ धरा पे सबसे बड़ा, तेरे प्रिय तुझको पहनाऊँ अपने चाम की जूती।
तर जाऊँगा जो कर सका इतना, सच पूछो तो मिलेगा सुकून बहुत मेरे दिल को।
गत मेरी जो भी बने – बनने दे, उफ् तब करता हूँ करीब होता नहीं है तू।
प्यार कर या चोट दे, किसी ना किसी बहाने मेरे मन से तेरी स्मृति ना मिटने दे।
वैसे तो हूँ मैं तीसमार खाँ, बन जाऊँगा बहुत बड़ा सरमाँ जो तेरी कृपा से कर दिखाऊँगा कहा हुआ तेरा।
सताया है तुझे बहुत हर पल दिया नये – नये अजीबों – गरीब कर्मों की सौंगात।
किसी और लायक नहीं तेरे में, फिर भी डोरे डालने से चूकूँगा नहीं।


- डॉ.संतोष सिंह