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Hymn No. 1630 | Date: 30-Mar-2000
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कसम से, कसम से तारी है तेरी आँखों का नशा दिल पे हमारे।
कसम से, कसम से तारी है तेरी आँखों का नशा दिल पे हमारे।

शिकवा ना है हमको तुझसे, शिकवा है हमको हमारे दिल से।

मशगूल हो जाना चाहता हूँ प्यार में तेरे।

प्यार भी करता हूँ, फिर भी दूर किये रहता हूँ।

समझते हुये नासमझी भरे करमों में बहता हूँ।

इलजाम देता हूँ खुद को, खुद तेरे अनमोल प्यार वास्ते।

फिर भी हें विश्वास दिल को, फतह करेंगे प्यार को।

करना पड़ेगा होम जीवन तो करेंगे, सिर्फ बनके तेरा जीयेंगे।

झुकेंगे ना मन के आगे, लगाये चाहे कितनी भी लंबी दौड़।

दिल पे चढ़ा है तेरे प्यार का रंग, जीवन का हर रंग होगा बेरंग।


- डॉ.संतोष सिंह