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Hymn No. 1632 | Date: 30-Mar-2000
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कुछ भी कह ले तू, हो चुका है तू मेरा।
कुछ भी कह ले तू, हो चुका है तू मेरा।
होगी चाहे लाख दूरी तेरे – मेरे बीच में, पर दिल हो चुका है तेरा।
कितना भी रहूँ महफूज, मन पहुँचता है सदा पास तेरे।
होता है अब कभी भी दीदार तेरा, आँखें बंद हो या खुली।
अचानक धड़क उठता है दिल, जब होता हें अहसास तेरे सामीप्य का।
कुछ खोया – खोया सा रहता हूँ, जब तुझको भुलाके लेता हूँ श्वास।
तू कह ले कितना भी कुछ, सब कुछ जानने लगा हूँ तेरा।
योग्य – अयोग्य का घेरा तोड़के, दिलो जान से हो गया हूँ तेरा।
छुपना ना रहा वश का तेरे, आ जाता है अपने आप करीब तू मेरे।
मैं हो चुका हूँ चकनाचूर, बदल जो चुका प्यार में तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह