VIEW HYMN

Hymn No. 1635 | Date: 31-Mar-2000
Text Size
जानके हैरान हो गया, हम नहीं थे, नहीं है, नहीं रहेगे।
जानके हैरान हो गया, हम नहीं थे, नहीं है, नहीं रहेगे।
शब्दों का अर्थ समझा, पर जाना नहीं मर्म अभी तक।
मौन होके आँखों में आँख डाले देखू तुझे, कह न जाऊँ कुछ।
हैरानी की बात है ना होने का चक्कर, क्यों है इतना कुछ।
जो शाश्वत जग जाहिर है, उसमें टिकता नहीं क्यों मन।
अभेद में भेद अक्षुण्ण में क्षणभंगुर तेरा है कैसा यें गुर।
गुरूओं के गुरू तू खेले क्यों ऐसा खेल जो न आये समझ।
कहने करने का कोई मतलब नहीं, फिर भी भार है कर्मों का।
तेरे सिवाय कोई ना अजीज, फिर भी डर दिखाये तू अजीब।
कर दे गुत्थी का हल, पर प्यार के दिल को उपहार देके।


- डॉ.संतोष सिंह