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Hymn No. 1637 | Date: 01-Apr-2000
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मुझे ना खुश करना है किसीको, मेरी खुशी जुड़ी है सिर्फ तुझसे।
मुझे ना खुश करना है किसीको, मेरी खुशी जुड़ी है सिर्फ तुझसे।
संसार में रहता है तो क्या, मेरा दिल जुड़ा है सिर्फ तुझसे।
गृहस्थ हो गया हूँ तो क्या, मन तो भागता है हर पल ओर तेरे।
लुभा नहीं पाते लुभावने लोग मुझे, लुभाये हर पल मेरे दिल को छवि तेरी।
आती है हँसी अपने आप पे सभी पे, जब दिल मान बैठा था तू है बहुत दूर।
जरूरत मरी नहीं है मन की मेरी, सबसे बड़ी जरूरत है तू मेरा।
होता है घाव तन पे तो कोई रंज नहीं होता, दिल के घाव हिला जाते है अंतर को
जंतर मंतर करके ना है कोई तमन्ना, मर जान चाहता हूँ, कुर्बान होके तुझपे।
झूठ होगी बहुत सी मेरी बातें, एक-एक कतरा सच है जो जुड़ा है तेरे मेरे दिल से।


- डॉ.संतोष सिंह