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Hymn No. 1639 | Date: 01-Apr-2000
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मस्ती में रहता हूँ हर पल खोया यूँ ही ख्यालों में तेरे।
मस्ती में रहता हूँ हर पल खोया यूँ ही ख्यालों में तेरे।

रहता हूँ कुछ ना कुछ करते हुये, हर श्वास में जीता हूँ तेरे संग।

खदबदाहट है अंतर में, जो जीतना चाहता है तेरा संग सदा के वास्ते।

शुरूआत तो की है बहुत धीमी, होगा अंत प्यार में बहुत जोरदार।

लपेट में हूँ, अभी तो जग के, आयेगा सब कोई चपेट में जब खोऊँगा प्यार में।

गुनगुनाहटों का सिलसिला थमता नहीं, निकले कोई ना कोई गीत डूबते तुझमें।

रस्मों – कसमों का कोई दौर नहीं, प्यार के सिवाय कोई जोर नहीं।

हर शोर – शराबे से रहता है दूर, पास में आँखों का नूर तू।

मन का मोर थिरके संग उसके, चूर होके प्यार के नशे में।

अश्क बहाता जा रहा हूँ आनंद का, आनंद में बेदम सा होके तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह