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Hymn No. 1640 | Date: 02-Apr-2000
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किससे कहूँ दिल की बात मैं, बता दे तू ये आज।
किससे कहूँ दिल की बात मैं, बता दे तू ये आज।
क्या इतना गया गुजरा हूँ कि, किसी के साथ का काबिल नहीं।
सब कुछ स्वीकारा है आँखें मूँदके, तुझसे ना किया कोई प्रश्न कभी।
माना कि दोष बहुत है मुझमें, पर चाहा खुश करने को तुझे।
सजा जो भी कोई की है निश्चित, ना है उसपे कोई एतराज।
पर एक ही बात कहता हूँ प्रभु हर बार मैं तुझसे।
तेरी कृपा से झेला हूँ बहुत बार तकलीफ भरे दौर को।
तकलीफ का हर दौर सह सकता हूँ, पर तेरी नाराजगी ना कभी।
यक्ष प्रश्न है मेरे वास्ते, तू खुश ऐसा क्या कुछ करूँ।
नाकाबिल को काबिल बनाना हाथों में है तेरे पर रूसवा होके नहीं।


- डॉ.संतोष सिंह