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Hymn No. 1643 | Date: 03-Apr-2000
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ख्वाब देखता हूँ दिन – रात तेरा होने का।
ख्वाब देखता हूँ दिन – रात तेरा होने का।
तय है ऐसा होना, चाहे नसीब में ना हो मेरे।
मैंने कुछ ना किया है ऐसा, मजबूर हो तू प्यार के लिये।
पर देर से सही, नाम रोशन करेंगे राहे प्यार में।
अभी तक तो ना है सीखा, कायम रहना बातों पे।
पर हर पल – दो पल में, आता है दिल को याद तू।
ज्यादतियाँ तो की है, प्रिय कई साथ तेरे।
कुछ भी कहूँ लें, किया हूँ न रास आया कभी खुद को।
अभी तो तेरे – मेरे बीच की दूरी है ज्यों की त्यों।
बन गयीं है मेरे दिल की मजबूरी, करना है खत्म इसे।


- डॉ.संतोष सिंह