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Hymn No. 1644 | Date: 04-Apr-2000
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दिल की क्यारी में, खिले है फूल प्यार के।
दिल की क्यारी में, खिले है फूल प्यार के।
यार को रिझाने वास्ते, झूम रहा है संग बहार के।
शमा है मस्ती भरी, ख्यालों के पक रहे है पुलाव।
सच पूछों तो चूर है सर से पाँव तक प्यार में।
खबर ना है किसीके आने – जाने की, बेखबर हूँ इंतजार में।
उस और से आती पवन से पूछ बता कहाँ है यार मेरा।
छेड़ती है फिजाये मनभावन शमा बाँध के।
समय कर जाता है बेकरार दिल को।
हँसता है हर कोई मेरी हालत देखके।
फिर भी एतबार आयेगा मेरे प्यार पे जरूर।


- डॉ.संतोष सिंह