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Hymn No. 1683 | Date: 23-Mar-2000
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तू मुझे न मार इतना, चाहे हो कसूर मेरा कितना।
तू मुझे न मार इतना, चाहे हो कसूर मेरा कितना।
चाहा था तुझे हमने, उसकी सजा ना देना तू ऐसी।
माना कि जितना कहा तूने, उतना ना किया हमने।
हक है तुझे शिकवा करने का, पर दिल ना तोड़ना किसीका।
तेरे पास है मेरे हर सवालों का जवाब, पर ना मैं दें सकता तेरा जवाब।
ख्याल न था कुछ कर बैठूँगा ऐसा, जिससे तू रूठ बैठेगा।
अब मान भी जा, इक् बार को मेरा कहा मान भी जा तू।
तेरा कहा करना है, चाहे जीवन से पड़े हाथो को धोना।
श्वासों की ठोर से बाधूँगा तुझे, कहा हुआ तेरा करवाने के वास्ते।
हो जाये अब कुछ यत्न करुँगा भरसक, तेरा साथ निभाने के वास्ते।


- डॉ.संतोष सिंह