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My Divine Blessing
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Hymn No. 1684 | Date: 24-Apr-2000
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बड़ी – बड़ी बात करता हूँ बहुत, तेरे पास रहके रहता हूँ दूर बहुत।
बड़ी – बड़ी बात करता हूँ बहुत, तेरे पास रहके रहता हूँ दूर बहुत।
इंसा के वेष में दरिंदा हूँ, जब – तब दुखाया तेरे दिल को।
एक समय था तू करता था नाश पापीयों का, बिना किसी हिचक।
आज देके अपना अमूल्य संगत, बदलने चला है क्यों तू मुझे।
बदलने की थी भी हमारी तमन्ना, जो जागी अपरम्पार तेरी कृपा से।
न जाने कितनी बार दोहराया उसी गलतियों को, तेरा दिल दुखाके।
उफ् ना किया तूने, उफ् कर बैठा है मेरा दिल मन की मनमानियों के आगे
सिलसिला जारी है अनवरत् काल से दिल दुखाने का, कैसे सहता है तू।
थक गया हूँ इस नारकीय खेल से, पटाक्षेप चाहता हूँ अब।
दोष ना देता हूँ अब भी तुझे, किया – धरा है सब कुछ मेरा।
- डॉ.संतोष सिंह
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तू मुझे न मार इतना, चाहे हो कसूर मेरा कितना।
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