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Hymn No. 1685 | Date: 25-Apr-2000
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मेरे पापो का ना दे तू सजा ऐसी, दे देना कोई और सजा मुझे।
मेरे पापो का ना दे तू सजा ऐसी, दे देना कोई और सजा मुझे।

मत जुदा करना तेरे गीतों से कभी, ढल जाने दे इनको मेरे श्वासों में।

मैं खल – कामी बहुत बड़ा, देना तू सजा कोई और तरह की।

जिसे देखके कर उठे दुनिया जयजयकार तेरी, कह उठे सब लायक था इसके।

फिर भी मेरे मन को देना तू पास आने अपने, विचर लू तेरे साथ ख्वाबों में कभी।

हो जायेगी बड़ी कृपा गायेंगा गीत दिल प्रीत का, चुपके से निहारूँ किसी कोनें से तूझें।

मैं मुरखानंद सताया हूँ बहुत तुझे, हर सजा कम है मेरे वास्ते।

कसक ना रखना तू दिल में अपने, होश में ला – लाके करना बेहोश मुझे।

होर – होर कर उठे रोम – रोम मेरा, पर होने ना देना कमजोर दिल को तेरे।

हाँ मुझे कर लेने – देना तब भी प्यार, नजदीक से ना सही दुनिया के किसी कोने से।


- डॉ.संतोष सिंह