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Hymn No. 1697 | Date: 27-Apr-2000
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मुझे कुछ हो रहा है धीरे – धीरे खो रहा हूँ प्यार में।
मुझे कुछ हो रहा है धीरे – धीरे खो रहा हूँ प्यार में।
जादू चलाने चला था, खुद ही हो गया शिकार प्यार का।
कुछ भी समझ नहीं आ रहा है, समझ जाते रही प्यार के पीछे।
हो चुका हूँ बेकार, लें चुका है जो दिल में प्यार आकार।
करना है हर सपने को साकार, निराकार से प्यार को।
यार दोष ना है कुछ मेरा, मैं तो हो गया हूँ शिकार प्यार का।
कहना कुछ भी है बेकार, डूब जाने दो प्यार में मुझे।
यार तेरे बिना हूँ जिंदा लाश, श्वास भी चलती है तेरे नाम से।
कुछ भी ना है स्वीकार, तेरे बिन् करूँ सब कुछ बेमन् से।
कैसे बताऊँ शब्द भी है अधूरे, प्यार जताने के वास्ते।


- डॉ.संतोष सिंह