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Hymn No. 1698 | Date: 28-Apr-2000
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सच पूछो तो हाल बहुत बुरा है प्यार में तेरे।
सच पूछो तो हाल बहुत बुरा है प्यार में तेरे।
काटो तो खून नहीं, हैराना है हम हाल पे अपने।
सपने देखा है सदा तेरे प्यार के, ऐ यार मेरे।
हा गुमा करता हूँ तेरे प्यार पे, ना अपने ऊपर।
हर बार करता है दिल कहने को हाल तुझसे अपना।
जपता हूँ तेरा नाम, यादों में गुम होतें तेरे।
ख्यालों का क्या कहना, कोई और बात ना होती है उनमें।
संसार भी सुहाना लगता है, जब दिल डूबा रहता है प्यार में तेरे।
मत पूछो हाल दिल का, सुनके हो जायेगा बेहाल तू।
सारे ख्याल मिट गये, फंस चुका हूँ प्यार के जाल में।
बाकी है अब बस दम तोड़ना प्यार में तेरे।
गमों का साथ तो कब का कब छूट गया प्यार में तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह