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Hymn No. 1699 | Date: 28-Apr-2000
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सारे शहर में हो गया शोर, मुझपे चल गया प्यार का जोर।
सारे शहर में हो गया शोर, मुझपे चल गया प्यार का जोर।
गौर करने जैसा ना रहा, हम तो हो गये खौर प्यार के तेरे।
मन मोर बनके नाचे, हर लोक – लाज भूला प्रियतम् के प्यार में।
हालत हो गये है ऐसे, जश्न का रहता है आलम बदहाली में।
दाल गलती नहीं अब किसीकी, जो हो गया वश में प्यार के।
सूना – सूना लगता है भीड़ भरा शहर, जब पाता नहीं करीब प्यार को।
दीवाना बन भटकता हूँ, जब से छाया आलम प्यार का मुझपे।
बूतपरस्ती से अबूतपरस्ती में चला जाता हूँ कब, रहता नहीं ख्याल कुछ का।
दोष देना है जितना भी दे दो मुझे, मत देना मेरे यार को।
सजा देना जितना भी मेरे तन को, करुँगा कबूल ये ना माकूल जो खोया प्यार में तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह