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Hymn No. 1700 | Date: 28-Apr-2000
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तेरी आँखों का क्या कहना, जो पिलाये जाम सुबहो – शाम।
तेरी आँखों का क्या कहना, जो पिलाये जाम सुबहो – शाम।
लेने ना दे चैन कर जाये बेचैन, हर पल दिल को।
बला की ताकत है, कब भी कहीं से खींच लाये पास तेरे।
कर चुकी है मुझे बेशर्म, करॅं भी चाहे कोई भी करम।
धरम से मिट चुका लेना – देना, जो बन गया मेरा धरम तू।
फिकर नहीं किसी बात की, हर सजा मंजूर है प्यार में तेरे।
गौर करना क्या किसी पे, भोर हो चुका है जीवन में प्यार का।
अंदाज है अपना – अपना, हमें तो ना मंजूर है क्या करना भी।
तमाशे से कम नहीं मेरा जीवन, मजा आता है प्यार में तेरे।
तसव्वुर हुआ नहीं दिल को प्यार से तेरे, बाकी है डूबने की और तमन्ना।


- डॉ.संतोष सिंह