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Hymn No. 1701 | Date: 28-Apr-2000
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कुछ – कुछ होने लगता है, तेरे सामने आते ही।
कुछ – कुछ होने लगता है, तेरे सामने आते ही।
देखा हुआ ख्वाब भी सच होने लगता हें, खोते ही तुझमें
उड़ जाती है नींद आँखों की, जैसे जुड़ता हूँ तुझसे।
धड़क उठता है दिल मेरा, तेरे आने के अहसास से।
बंध जाते है तेरे पाश में, रहता है जब तू पास में।
बन गया हूँ, तेरा दास, जब से हुई मुलाकात।
जब झाँकता हूँ आँखों में तेरी, लगती है उखड़ने साँसें।
सच पूछों तो विश्वास होता नहा। हो गया मैं प्यार का।
खत्म हो जाता है जीवन का दामादोर, याँदों में तेरे खोते ही।
बदल चुका है आमूल चूल, तेरे प्यार भरे अंदाज की बदौलत।


- डॉ.संतोष सिंह