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Hymn No. 1702 | Date: 28-Apr-2000
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यार जन्म लिया है तेरी आँखों से मद भरे प्याले पीने के लिये।
यार जन्म लिया है तेरी आँखों से मद भरे प्याले पीने के लिये।
आज साकी मदहोश हो जाना चाहता है चूर, नशें में अपने यार के हाथों
कुछ तो ना है जो चुका सके तेरे प्यार की इक् बूँद की कीमत को।
हाँ इतना जरूर है नशें में चूर होने के बाद करेंगे तूझें चूर जरूर प्यार के नशें में।
सुरूर जो छायेंगा टूटनें ना देंगे, चाहे टूट जाये नाता श्वासों की डोर से।
खलल ना होती है किसी बात की अब, जो रहता हूँ डूबा प्यार में तेरे।
समझना ना है अब कुछ मुझे, दीवानो हो चुका हूँ प्यार में तेरे।
मस्ती आती है हर माहौंल में, जीना कर जाती है मुहाल मेरा।
हो चुका हूँ सर से पाँव तक गुलाबी, बला का प्यार जो पाया तुझसे।
दूरियाँ थी जो मन की अब मिट चुकीं है जब से डूबा यादों में तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह