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Hymn No. 1705 | Date: 28-Apr-2000
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तरस खाके न आना तू पास मेरे, दया करके न देना साथ तेरा।
तरस खाके न आना तू पास मेरे, दया करके न देना साथ तेरा।
हो जाये पूरा विश्वास प्यार पर मेरे, पल गँवाये बिन आना पास मेरे।
माना कई बार दगा दिया है तुझे, अपनी कुटिल आदतों के चलते।
खलता है मुझे किया हुआ मेरा, गलती नही दाल जब पास तेरे।
हाल मुझसे मेरा ना छुपा भी है कुछ तुझसे, घुसा है भीतर न जाने क्या - क्या।
बयाँ करने से ज्यादा जानता है तू, अब तो रोता हूँ खून के आँसू तेरे वास्ते।
रह नहीं पाता पल भर को, मन भी भागता है हर पल पास तेरे।
चल सकता है सबके बिना मेरा, चलाये चलता नहीं यार तेरे बिना।
क्या कर डालूँ कुछ ऐसा, जो कर जाये खुश यार दिल को तेरे।
तब भी कहूँगा न जाना मिन्नत पे, प्यार देखके आना तू पास मेंरे।


- डॉ.संतोष सिंह