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Hymn No. 1708 | Date: 29-Apr-2000
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आग लगी नहीं तो क्या, लगा दूँगा चारों ओर।
आग लगी नहीं तो क्या, लगा दूँगा चारों ओर।
चलता नहीं जोर तो क्या, लगा दूँगा पूरजोर।
कोई कसर बाकी ना रखूँगा, तुझे प्यार करने से।
मर्जी है तेरी तू प्यार कर या नफरत, हँसके करुँगा कबूल।
दामन में फूल बरसा या काँटे, रखूँगा सहेज कर उसे।
कोई ना मौका देंगे, तुझे उलझन में डालने के लिये।
उलफत भी मिली तो मनायेंगे खुशियाँ, खुशनसीबी पे अपने।
मेहरबान तू करना इतना कद्र, दे देना मौका चूमने को करमों को तेंरे।
इंसा बनके ना हो नसीब में तो धूल बनाके लिपट लेने देना।
तू गौर कर या ना कर, पर दौर पे दौर जारी रखना प्यार का।


- डॉ.संतोष सिंह