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Hymn No. 1710 | Date: 29-Apr-2000
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मुझे मालूम है कहीं तो है कुछ कमी, तभी तो मिलते नहीं शब्द दिल का हाल बयाँ करने के वास्ते।
मुझे मालूम है कहीं तो है कुछ कमी, तभी तो मिलते नहीं शब्द दिल का हाल बयाँ करने के वास्ते।
दूर है तू जरूर पर दिल को नहीं मंजूर, कैसे भी हालात में पहुँचाना चाहता हूँ पैगाम प्यार का।
मर्जी तेरी तू कर कबूल या ना कर, हश्र जो भी हो तैयार है तेरा प्यार पाने के वास्ते।
शब्दों का पैगाम मुमकिन ना हुआ तो, भेजेगे तराना प्यार का नजरों से तेरे वास्ते।
सुनना न चाहे तो कोई बात नहीं, बनके तरंग छू लेंगी दिल को तेरे, कर जायेगी मजबूर तुझे।
रह सकता है तू हमसे बहुत दूर, पर रोक नहीं सकता मन को तेरे पास आने से।
कितना भी करवा लें तू मशक्कत करने को हूँ तैयार, यार तेरा प्यार पाने के वास्ते।
छोड़ जाये मेरा साथ हर कोई, करुँगा ना उफ्, पर तेरी नजरों की बेरुखी सह न पाऊँगा पल भर को।
अंजामें मोहब्बत में जो भी हो हाल मेरा मंजूर है, पर रहना साथ तू जरूर।
हमें है पता, तुझे है पता सब कुछ, अब तो बता दे कब तक खेल खेलगा तू हमसे।


- डॉ.संतोष सिंह