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Hymn No. 1712 | Date: 29-Apr-2000
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रंग दे मेंरे अंतरमन को तेरे प्यार के रंग से।
रंग दे मेंरे अंतरमन को तेरे प्यार के रंग से।
चढे ना उसपे कोई दूजाँ रंग, चढ़ जाये जो तेरा रंग।
मुझे ना चाहियें कुछ और, तेरे प्यार के सिवाय।
इंतजार में हूँ कब का, लपक के थाम लूँ तेरी बहियाँ।
कभी हो जाता हूँ हताश, दूर तुझसे बहुत पाता हूँ।
कभी उत्साह से भर उठता हूँ, महसूस करता हूँ तुझे श्वासों में।
तेरा अनमोल प्यार क्यों हो जाता है बेअसर मुझपे।
लाख कोशिश करने के बाद क्यों चला जाता हूँ दूर तुझसे।
लायक न था तो क्यों आया करीब तेरे।
अगर इस जन्म में ना है, तो तू मिटा दे बदर्दी से मुझे।


- डॉ.संतोष सिंह