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Hymn No. 1714 | Date: 30-Apr-2000
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है प्रियतम् जानता हूँ तू है दुनिया का सबसे बड़ा सौदागर।
है प्रियतम् जानता हूँ तू है दुनिया का सबसे बड़ा सौदागर।
बहुत बड़ा जिगर चाहिये, यार तुझसे सौंदा करने के वास्ते।
होना पड़ता है नीलाम, यार तुझसे कुछ पाने के वास्ते।
तुझसे सौदा करने वालों की, बड़ अजीब और लम्बी है दाँस्ता।
बड़े – बड़े की हो जाती है हिम्मत पस्त, प्रियतम् तेंरे आगे।
जिसनें जाना तेरा राज, प्यार के सिवाय ना किया सौदा कोई और।
सर देके जो पाया इसे, समझ लो यारों छूटा बहुत सस्ते में।
सच पूछो तो औकात ना है जमाने भर में, करे कोई सौंदा तुझसे।
तेरी कृपा और मतवाले अंदाज वाले, कर गूजरतें है सौंदा तुझसे।
इनके आगे ना है कोई अपनी बिसात, पर तेरे प्यार में होके चूर कर लेते है हम भी कोशिश।


- डॉ.संतोष सिंह