VIEW HYMN

Hymn No. 1715 | Date: 01-May-2000
Text Size
प्यार के सिवाय न चाहूँ कुछ, प्यार ही है मेरा आखरी मुकाम।
प्यार के सिवाय न चाहूँ कुछ, प्यार ही है मेरा आखरी मुकाम।
तू ही एक मेरा परम् प्रिय परमेश्वर, न जाना कहीं और मुझे।
तेरे सिवाय ना मुझे कुछ, ना ही बुझता है मेरा दिल कुछ और।
रास न आये मेरे मन को कुछ और अब, रहे कही भी, भागे और तेरे।
असफलताओं का लगा है तांता, बाज नहीं आये डोरे डालने से तुझपे।
दीदार हुआ है कई बार तेरा, अब भी तरसता है मन दीदार को तेरे।
मेरा हाल देखके न खाना तरस, बुलाऊँ कितना भी आना नहीं तू।
तड़पेगा मेरा दिल तेरे वास्ते, जो बढ़ाते जायेगा दिल में प्यार तेरे वास्ते।
दूध का जला पीता है छाँछ फूँक – फूँकके, प्यार का मारा, प्यार करेगा घर-बार छोड़के।
अब रूकना ना रहा वश में मेरे, दस्तक देता है दिल बार-बार तेरे दरबार में।


- डॉ.संतोष सिंह