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Hymn No. 1716 | Date: 02-May-2000
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बहुत ही यत्नों के बाद मिलता है प्रियतम साथ तेरा।
बहुत ही यत्नों के बाद मिलता है प्रियतम साथ तेरा।
जब तक ना होती तेरी कृपा, तब तक तू आता नहीं हाथ।
करना पड़ता है मन के संग जेहाद, तब मिलता है तेरा प्रतिसाद।
पल भर का तेरा साथ मिलते हो जाते है दूर जीवन के अवसाद।
वो बात ना रहती, कुछ और बात बन जाती है तेरे रहने पे।
गुजारे गये पलों को भुलाके, भविष्य से भी मुक्त रहते है साथ तेरे।
होता होगा महत्वपूर्ण बहुत कुछ, ना-न-ना कहते है हम।
तेरे रहते ना रहता है मस्ती के सिवाय आलम और किसीका।
कैसी भी हो दशा, आता है आनंद तेरे साथ होने पे।
मुझको है विश्वास तू रखेगा सदा साथ – साथ हमको अपने।


- डॉ.संतोष सिंह