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Hymn No. 1717 | Date: 02-May-2000
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ओ मेरे सरकार, आया तेरे दरबार में एक बेकार।
ओ मेरे सरकार, आया तेरे दरबार में एक बेकार।
दे दे उसको तू आकार, पिलाके अमृतमय प्रेम की बूँदे।
भूत तो अभूतपूर्व है, तरह – तरह के कारनामों से।
तेरे द्वारा डाले गये संस्कारों पे डालनी होगी नज़र कृपा की।
यत्नें को बढ़ाने के वास्ते देना होगा प्रतिसाद सामर्थ्य का।
उँगली पकड़के सिखाना होगा चलना जीवन पथ पे।
पानी न फेरेंगे तेरे किये हुये पे, लगा देगे जोर जान का।
चूकेंगे ना किसी अवसर को, पैनी निगाह रखेंगे अपनी।
तेरे इशारे को पूरा करने वास्ते, बना लेगे जीवन लक्ष्य अपना।
कुछ भी करके कर दिखायेंगे जी जान से तेरा सपना।


- डॉ.संतोष सिंह