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Hymn No. 1718 | Date: 02-May-2000
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रह लू कितना भी साथ तेंरे, मिलता नहीं तसल्ली दिल को।
रह लू कितना भी साथ तेंरे, मिलता नहीं तसल्ली दिल को।
बातें ना बनातां हूँ सुनाता हूँ हाल दिल का अपने।
देखता हूँ ख्वाब तेरे साथ का, जागते हुये दिनों का।
रातें गुजरती है बदलते करवटे, नींद होती है कोसो दूर।
धड़कते हुये दिल पे छाया रहता है आलम प्यार का।
सम्भाले नहीं सम्भलता हूँ, जब पहुँचता हूं करीब तेरे।
तू कितना भी सुनके कर दे अनसुना, फिरूँगा कहता जमाने से।
आज बोलबाला है तेरा, कल होंगा शोर मेरे प्यार का।
माना नहीं तेरा कहा हुआ, भुगतनी पड़ेगी सजा उसकी।
जो भी झेलना पड़ेगा झेलूँगा, प्यार तुझसे करता रहूँगा।


- डॉ.संतोष सिंह