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Hymn No. 1719 | Date: 03-May-2000
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बातों का तो ढेर है मेरे पास, काम का नाम नहीं।
बातों का तो ढेर है मेरे पास, काम का नाम नहीं।
पीया हूँ तेरे प्यार का जाम, होने ना दूँगा बदनाम नाम।
कीचड़ में भी जन्मता है, सर्वांग सुंदर अलिप्त फूल कमल का।
तेरी कृपा को न जाने दूँगा बेकार, लगा दूँगा ढेर यत्नों का।
करुँगा तेरा हर सपना साकार, अपने दृड़ प्रयत्नों से।
बिन माँगे किया है पूरी, तूने मेरी हर इच्छाओं को।
शातिर मैं इतना नहीं जो कर सकूँ कुछ तेरी खातिर।
रिश्ता है जो तेरा – मेरा, उसे मिटा सकता ना कोई।
इस रोते हुये इंसा को, हँसना सिखाया है तूने सदा।
गुरूर ना है सुरूर है तेरे प्यार का जो करायेगा हर काम पूरा।


- डॉ.संतोष सिंह