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Hymn No. 1722 | Date: 03-May-2000
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मेरी हालत देखके तू कैसे रह सकता है चुप।
मेरी हालत देखके तू कैसे रह सकता है चुप।
माना तू जाने बहुत कुछ, अंदाज ना है मेरे प्यार का।
यार की है बेकफाई बहुत बार तुझसे हमने।
पर एतबार करना, ना रखा तुझे धोखे में हमने।
जताने का सिला जो देना तो करेंगे कबूल हँसके।
हाल होगा जो भी हमारा, चूकेंगे ना मौका प्यार करने का।
गम हो या खुशी हर हाल में होंगे इक् से।
तेरे नाम का दम भरके, जी लेते है जिंदगी हम।
जो भी दे दे मेरे प्यार को नाम कबूल है हमको।
बस करते रहने देना प्यार, चाहे गुमनाम रहना पड़े।


- डॉ.संतोष सिंह