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Hymn No. 1724 | Date: 04-May-2000
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मत तू ग़म कर मेरे वास्ते, बिगड़ा ना अभी कुछ।
मत तू ग़म कर मेरे वास्ते, बिगड़ा ना अभी कुछ।
सोते से जागा हूँ मैं आज, जब गिरी नजरें से तेरे गाज ।
राज मेरी जिंदगी में कुछ ना रहा, उधेड़ दिया दिल को तेरे सामने।
कमजोर कितना भी है तन – मन मेरा, ठान लिया हूँ तेरा कहा करना।
डर ना रह गया किसी से, बेपरवाही का जाम जो पी लिया।
चूकेंगे ना अब कोई मौका, गुजार देंगे आँखों में तेरे सारी रात।
जब तक ना बनेगी अपनी बात, आराम – हराम है हमारे वास्ते।
ये गीत ना है ख्वाबों का, आवाज निकले दिल से यार मेरे।
बबूल से भरे पथ पे चल लूँगा, अब रूकना मौत है मेरे वास्ते।
तेरा कहा करने से भिड़ जाऊँगा दुनिया से, पर पीछे ना हटूँगा।


- डॉ.संतोष सिंह