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Hymn No. 1725 | Date: 04-May-2000
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गा लेने दे दिल को तेरे प्यार का तराना ।
गा लेने दे दिल को तेरे प्यार का तराना ।
जाना था अब तक कुछ और, जान है अब और कुछ।
वहीं का वहीं रहके फरक है सब कुछ में।
जो दोष देखा था बाहर, उसको पाया भीतर मैंने।
अजब शुरूआत थी, गजब हो गया प्यार में।
मैं न काम का था, अब तो औंर बेकार हो गया।
जाग उठा हूँ पाके प्यार तेरा, कर दिखाने को।
जो हाथों में न था, वो आ गया हाथों में।
पास तो तेरे कब से था, पास पहुँचा अब जो।
मुकाम पे पहले पहुँचा, शुरूआत हुई यात्रा की बाद में।


- डॉ.संतोष सिंह