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Hymn No. 1726 | Date: 05-May-2000
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ऐसा कुछ भी ना है जीवन में, जो कर ना सके हम।
ऐसा कुछ भी ना है जीवन में, जो कर ना सके हम।
तेरी कृपा हमारा यत्न, कर दिखाता है सब कुछ संसार में।
लगन से किया हुआ हर कार्य पूरा होता है संसार में।
कितनी भी आये मुश्किलें, बदलता है पुरूषार्थ के आगे भाग्य।
विधाता ने बनाया है हर इक् को अपने भाग्य का विधाता।
कमजोर है जो डालते है उसके ऊपर अपनी असफलता का भार।
लाखों गुजारते है जीवन, किस्मत के आगे नतमस्तक होके।
निकलता है कोई एक सिरफिरा, जीता है जीवन अंदाज में अपने।
मजबूर हो जाते है उसके आगे भूत – भविष्य – वर्तमान।
कालो की छोड़ो उसकी मस्ती में रंग जाता है पुर्ण-परमात्मा।


- डॉ.संतोष सिंह