VIEW HYMN

Hymn No. 1734 | Date: 08-May-2000
Text Size
कुछ ऐसा हो जाये, सुनके तू खो जाये।
कुछ ऐसा हो जाये, सुनके तू खो जाये।
गीत निकले दिल के भीतर से कुछ ऐसे।
मजबूर कर दे, मचलने के वास्ते तुझे।
कहीं भीतर से धड़का जाये तेरे दिल को।
रख न पाये तू काबू अपने आप पे।
बह जाये मस्ती में, बँध जाये समाँ ऐसी।
खालीशी प्यार के सिवाय और कोई बात न हो।
समा में प्यार ढलके, तेरी मूरत रूप में थिरके।
कोई रोक ना हो, कोई टोक ना हो प्यार में।
यार के सामने, प्यार के सिवाय कोई बात न हो।


- डॉ.संतोष सिंह