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Hymn No. 1735 | Date: 08-May-2000
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बता दो कोई मुझे और क्या – क्या करूँ यार से मिलने के वास्ते।
बता दो कोई मुझे और क्या – क्या करूँ यार से मिलने के वास्ते।
समर्थता ना देखो मेरी, लगा दूँगा झड़ी यत्नों की यार के वास्ते।
राह में हो चाहे कितने काँटें, लहूलुहान कदमों से बढ़ते जायेंगे।
यार का प्यार पाने के वास्ते, सर कलम कराके चढ़ाते जायेंगे।
दुनिया की सारी रीति – रिवाजों को तोड़के, पकडेंगे दामन यार का।
लगा देंगे सारा जोर दिल से यार के दिल तक सफर करने वास्ते।
जश्न मनाऊँगा हर पल मस्ती का, यार का सामीप्य अनुभूति करके।
जीवन की हर राह का मुख मोड़ दूँगा, यार के दर की और।
दम ना लूँगा तब तक, जब तक मिलन ना होगा यार के साथ।
हर राज का हमराज होगा वो, रहेगा ना भेद किसी भी तरह का।


- डॉ.संतोष सिंह