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Hymn No. 172 | Date: 07-Jun-1998
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और मजा आयेगा, और मजा आयेगा, जैसे – जैसे मैं तेरे करीब आऊँगा और मजा आयेगा, और मजा आयेगा ।
और मजा आयेगा, और मजा आयेगा, जैसे – जैसे मैं तेरे करीब आऊँगा और मजा आयेगा, और मजा आयेगा ।
तन के बीच चाहे हो लाख दूरियाँ, मन एक बार तुझसे जुड जायेगा तब, और मजा आयेगा, और मजा आयेगा ।
तेरे मन में उठेंगी जो तरंगहोगी हलचल मेरे मन में भी, बोल होगी तेरे दिल में,
लिखेंगे मेरे हाथ,और मजा आयेगा, और मजा आयेगा।
गाऊँगा मैं तेरे गीत झूम – झूमके, आँखों में होगी हर पल तेरी छवि;
तेरे प्यार में बन जाऊँगा तेरा दीवाना, और मजा आयेगा, और मज़ा आयेगा ।
हर कण – कण में मैं करूँगा तेरा दर्शन, दिन हो या रात हर पल;
तू रहेगा मेरे संग – संग, और मजा आयेगा, और मजा आयेगा ।
मैं भी तू बन जाऊँगा, तू ही तू नजर आयेगा, तेरे होने में मेरा होना है;
मैं मिट के भी मिट ना पाऊँगा, और मजा आयेगा, और मजा आयेगा ।
जीने और मरने की तब बात न होगी, सुख दुःख की किसे परवाह होगी;
यूँ ही हर बात में और मजा आयेगा, और मजा आयेगा ।
छूटेगा हर रिश्ता – नाता, माता कौन – पिता कौन, पराये भी अपने नजर आयेंगे;
जुड़ेगा हर दिलों से रिश्ता और मजा आयेगा, और मजा आयेगा।


- डॉ.संतोष सिंह