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Hymn No. 1772 | Date: 24-May-2000
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फिकर ना कर, जिक्र करना है तेरी मर्जी पे।
फिकर ना कर, जिक्र करना है तेरी मर्जी पे।
दूर कर दिखाऊँगा अपनी कमजोरियों को, तेरी कृपा यत्नों के सहारे।
अब ना चलेगी मुझपे तेरे सिवाय और किसीकी।
होगे दाग दामन में लाख, दिल में न है, कुछ भी।
गुप्त ना रखना है कुछ, जगजाहीर है मेरा सब कुछ तुझसे।
आदतें छुड़ाये न है छूटती, पर मन आगे न अब उनके पीछे।
जलता है जब तक प्यार का दिया दिल में मेरे।
दिल को न आने वाला है रास सिवाय् कुछ और तेरे।
प्यार का दौर अब और चलेगा मिटके ना मिटनें तक।
लापता हो जाऊँगा तेरे प्यार में प्यार का पता बनके।


- डॉ.संतोष सिंह