VIEW HYMN

Hymn No. 1779 | Date: 25-May-2000
Text Size
देता है जब तू सजा, आता है हमको मजा।
देता है जब तू सजा, आता है हमको मजा।
तेरी रजा जान न पाते, पर करना चाहते है प्यार।
उलटे – सुलटे करके काम कोई, दे देते है नाम तेरा।
पीना चाहते है जाम प्यार का, चुकाना नहीं चाहते दाम।
कैसे चलेगा बता तू राम, बिन् किये कोई काम।
वफा तो बनती है बहुत, अंजाम देती है बेवफाई।
साई तू है मेरा माई, कतर देना मेरे सारे पंख।
बंधा रहना चाहता हूँ तेरी डोर से, चले ना जोर कोई।
मन मेरा नाचे इर्द - गिर्द तेरे बनके मोंर की तरह।
हम भी न चाहते है डोरे डालना, सिवाय तेरे किसी और पे।


- डॉ.संतोष सिंह