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Hymn No. 1782 | Date: 27-May-2000
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साकी पिला दे प्यार का जाम इतना, जीत लूं मैं पलक झपकते तुझे।
साकी पिला दे प्यार का जाम इतना, जीत लूं मैं पलक झपकते तुझे।
रह न जाये ना करने को कुछ, हो जाऊँ चूर प्यार में तेरे इतना।
देर करना तेरा लगता है कि तू कोई पुरानी बँर का ले रहा है बदला।
मत तरसा अब इतना, जीना हो गया मुहाल मेरा प्रियतम् तेरे बिना।
अब न खोना चाहता हूँ किसी कारण वश, सारे कारण को मिटा दे तू।
नजदीकियों को बदल दें मिलन में, मिट जाये दिल की सारी जलन।
सम्भाले नहीं सम्भलता होश, देखते तुझे भर जाता हूँ इतना जोश में।
दोष कुछ ना है मेरा, इस तरह तो तड़पता है हर कोई प्यार में तेरे।
अब तो न खड़ा करने देना कोई कारण, हमको हो जाने देना तेरा।
चिरौरी करनी पड़े या मशक्कत चाहता हूँ अब कुछ भी करके हो जाऊँ तेरा।


- डॉ.संतोष सिंह