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Hymn No. 1785 | Date: 28-May-2000
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बैठा रहता हूँ पलके बिछाये इंतजार में, कह दू दिल का हाल कुछ अपने।
बैठा रहता हूँ पलके बिछाये इंतजार में, कह दू दिल का हाल कुछ अपने।
सपने देखता हूँ दिन – रात तेरे, फिर भी चैन मिलता नहीं जागते – सोते।
तू कह ले चाहे – है ये सारें खयाली पुलाव, पर देना चाहता हूँ मनको आराम तुझे लेके।
मानता हूँ तू है प्यार का सौदागर, कब तक तरसता फिरूंगा तेरे प्यार के वास्ते।
डगर पे चलना न आया तो क्या ये, जाते तो है तेरी ओर।
अभी और कितनी देर बाकी है, प्यार से भरा सबेरा होने के वास्ते।
दाँस्ता कोई नई न है वही सदियों पुरानी, पर अब बदलना है हाथो में तेरे।
कहर बरसाया कर्मों ने, माना कई बार बचाया अपने रहमत से तूने।
कब तक खेल चलेगा, खुद को खुद से दूर करके ठगता रहूँगा अपने को।
आस जगी है दिल में तेरे वास्ते, मिट जाने दे अब मुझे प्यार में तेरे।
- डॉ.संतोष सिंह
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काली नजरों वाला आया है, आँखों में भरके आँसू पास तेरे।
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जब से पहुँचा पास तेरे, न जाने क्या हुआँ दिल को मेरे।
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