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My Divine Blessing
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Hymn No. 1786 | Date: 29-May-2000
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जब से पहुँचा पास तेरे, न जाने क्या हुआँ दिल को मेरे।
जब से पहुँचा पास तेरे, न जाने क्या हुआँ दिल को मेरे।
हालत हो गयी है ये, मैं अपना होके अपने का ना रह गया।
तुझसे मिलता हूँ जब भी, बरसाती है तेरी नजरें मुझपे कहर।
जहर से भरे जीवन में आ जात है प्यार भरी बहार जो हर ले संताप को।
क्या बताऊँ क्या न होता है मेरे साथ, रहता है जब तू मेरे पास।
ये रस्म अदायगी गजल की न कर रहा हूँ, यें तो तड़पते दिल के है बोल।
ढोल बजा – बजाके करता है दिल नाचने का, नाचते हुये रम जाने का।
भाव बादलों की तरह उमड़ - घुमड़ रहे है मन में, बरसना चाहते है नजरों से।
गजर कर रहा है मनमानी, जो रोके रखा है मेरे समय को।
सब्र कर लूँगा, पर सब्र का पल खत्म होते ही हो जाऊँगा निशेष कदमों में तेरे।
- डॉ.संतोष सिंह
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बैठा रहता हूँ पलके बिछाये इंतजार में, कह दू दिल का हाल कुछ अपने।
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कोई है अच्छा, कोई बुरा, कोई है सच्चा कोई झुठा।
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