VIEW HYMN

Hymn No. 1787 | Date: 29-May-2000
Text Size
कोई है अच्छा, कोई बुरा, कोई है सच्चा कोई झुठा।
कोई है अच्छा, कोई बुरा, कोई है सच्चा कोई झुठा।
दुनिया में हर कोई है कुछ ना कुछ, बन सका ना मैं कुछ।
कोई है खुश, कोई दुखी, कोई है प्रेमी, कोई निरकुंश।
दुनिया में हर कोई है कुछ ना कुछ, बन बना सका मैं ना कुछ।
कोई है बुध्दिमान, कोई बुद्धु, कोई है मेहनतकश, कोई आलसी।
दुनिया में हर कोई है कुछ ना कुछ, बन ना सका मैं ना कुछ।
कोई है ताकतवर, कोई निर्बल, कोई है धनवान, कोई है निर्धन।
दुनिया में हर कोई जिये किसी ना किसी पात्र में ढलके, हम ना ढाल पाये कुछ में।
कोई है योग्य तो कोई हें अयोग्य, किसी का सद्भाग्य तो किसी का दुर्भाग्य।
दुनिया में गढी हर किस्मत में कुछ, हमने भी पाया अनमोल संग तेरा।


- डॉ.संतोष सिंह