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Hymn No. 1788 | Date: 29-May-2000
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हमने ना सोचा था हमारे आंसू दुखा जायेगे तेरे दिल को।
हमने ना सोचा था हमारे आंसू दुखा जायेगे तेरे दिल को।
पहुचना चाहा था आसूँओं के सहारे पास तेरे, ना पहुचाने ठेस तुझे।
भर आती है आँखे याद कर करके, ही बनना ही था दुखद पहलू का पात्र।
उपहास के लायक तो था मैं, पर न पता था हूँ इतना कुपात्र।
जुड़ा है सब कुछ हमारा तुझमें, पता न था जुड़के न जुड़ पाऊँगा तुझसे।
सीख पाने का यही तरीका रह गया था, जीते जी बना खलनायक नजरों में अपने।
सपने में जो न सोचा था वो कर गया मैं कर्म यथार्थ में।
जन्मने से पहलें क्यों ना मर गया, दुखाता ना कभी तेरे दिल में।
अरे लाख जिल्लते सहता कम से कम तुझे तो जिल्लत न उठानी पड़ती।
गोया अभागा होना तो ठीक था पर तेरे दिल को ठेस पहुँचाना है सबसे बड़ा जुर्म।


- डॉ.संतोष सिंह