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Hymn No. 1790 | Date: 30-May-2000
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छलके जाम तेरी नजरों से प्यार का, पी-पीके होता है तरबतर दिल मेरा।
छलके जाम तेरी नजरों से प्यार का, पी-पीके होता है तरबतर दिल मेरा।
आँखों में रहता है छाया सुरूर, सुझे न मन को मस्ती के सिवाय कुछ और।
पीने और पिलाने का दौर जॉरी रखना अनंत काल तक तो भी ना होगा संतोष।
दोष कहाँ है इसमें कुछ हमारा, कोई भी होता हमारी जगह हाल होता उसका ऐसा।
बस जाने का मन करता है दिल में तेरे, पीने के लिये मिलाना ना पड़े आँख।
अस्तित्व हो जायेगा खत्म मेरा, रोम – रोम घुल जायेगा प्यार की बूंद में।
दूर कर दूँगा तेरे दिल की हर रुसवाई को, कहाँ तेरा कर दिखाऊँगा प्यार के जोर से।
तू ही तो कहता है मंजिल हो एक, पर होती है राह सबकी अलग – अलग।
गाल न बजाता हूँ, हाँ मस्ती में तेरी बात ही दोहराता हूँ।


- डॉ.संतोष सिंह