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Hymn No. 1791 | Date: 31-May-2000
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ना बाबा, ना बाबा, ना बाबा न जाना है अब हमें उस ओर।
ना बाबा, ना बाबा, ना बाबा न जाना है अब हमें उस ओर।
भेंज दें तू बात अलग है, अब भी डरता है मन जाने से उस ओर।
शुरू हुआ है प्यार का नया – नया दौर, क्यों चाहता है खत्म करना इसे।
हमारे वश की बात न थी तेरे पास आने की, आये है तेरी रजामंदी से।
बंदगी करता हूँ तेरी लाख – लाख, भाग्य में जो न था दिया तूने वो।
अपनी फितरत के चलते न जाऊँ दूर कभी, हाँ तेरी रजामंदी की बात है अलग।
प्रियतम् हो जाये कुछ भी, पड़ने न देना तुझसे कभी अलग – थलग।
कंपकंपाते हाथों को थाम लेना, हो जायेगा स्थिर मन मेरा सानिध्य में तेरे।
अब न चलता है वश मुझपे मेरा, सारे अधिकार है हाथों में तेरे।
नाम भर का रह गया हूँ, बाहर – भीतर लिख गया है नाम तेरा।


- डॉ.संतोष सिंह