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My Divine Blessing
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Hymn No. 1792 | Date: 31-May-2000
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न रह गयी जरूरत अब हमको किसीकी, जो जुड़ गया तुझसे।
न रह गयी जरूरत अब हमको किसीकी, जो जुड़ गया तुझसे।
कसते है लोग – बाग ताने मनमाने, मनाता हूँ मौज न जाने किसा भात का।
मत पूछो मेरी जात अब, बेजात हो गया हूँ उसका हाथ पकड़कें।
धड़कता है दिल बस अब, सिर्फ उसका गीत गाने के वास्ते।
न जाना है हमको किसी और डगर पे, मंजिल मिल गयी है मेरी।
खिल चुका है दिल कमल के समान, उसको अपने भीतर बसाके।
मत सिखाओं मुझे अब कोई सऊर, प्यार में उसके बेसऊर बन गया।
अच्छे – बुरे का भेद मिट गया, जो मिला तरक में साथ उसका।
इस अकड़ का क्या कोई कर सकता है जो वो बस गया मेरे श्वासों में।
फूल – पत्थर में न रहा भेद, जब से देखा अपने राम को करते वास सबमें।
- डॉ.संतोष सिंह
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