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Hymn No. 1793 | Date: 31-May-2000
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कैसे – कैसे बोल उभर रहा है दिल में, सुनता हूँ घबरा जाता हूँ।
कैसे – कैसे बोल उभर रहा है दिल में, सुनता हूँ घबरा जाता हूँ।
मौंज में तू जो भी लिखा दे, ध्यान जाने पे झकझोर जाता है हमको।
कोई सुनेंगा तो कहेगा है बहुत अकडू, पर वास्तव में देखा जाय तो हम है पकडू।
देखा जाये तो हम है बेकार, बैठे – ठालें भिड़ाते है तिकड़म हजार।
सूझता न है कुछ और हमको, आलस से भरे पलों में लेते रहते है नाम तेरा।
भाव कोई देता न है हमको, बेभाव रहके भाव बनाते है तेरे नाम पे।
पिलाते जाना तू जाम प्यार का, बेनाम जुड़कें तेरे नाम से कर जायेगे कहाँ।
मार – प्यार बहुत खायी है तेरा, बरसाना तेरी मर्जी सदा हम पे प्रियतम्।
जमना न आया है अभी भी, जम जाने देना खोके प्यार में तेरे।
डेरा डाला है तेरे घर के सामने, थामे रखना तू हमको सदा पास अपने।
- डॉ.संतोष सिंह
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